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ऐही ठेयां झुलनी हेरानी हो रामा! – शिव प्रसाद मिश्र की कहानी

महाराष्ट्रीय महिलाओ की तरह धोती लपेट, कच्छ बांधे दुलारी दनादन दंड लगाती जा रही थी। उसके शरीर से टपक टपक कर गिरी बूंदों से भूमि पर पसीने का पुतला बन गया था। कसरत समाप्त करके उसने चारखाने के अंगोछे से अपना बदन पोछा, बंधा हुआ जूड़ा खोलकर सिर का पसीना सुखाया और तत्पश्चात आदम कद आईने के सामने खड़ी होकर पहलवानों की तरह गर्व से अपने भुजदंडों पर मुग्ध दृष्टि फेरते हुए प्याज के टुकड़े और हरी मिर्च के साथ उसने कटोरी में भिगोए हुए चने चबाना आरंभ किया। Continue Reading