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Google Ranking Factor: Core Web Vitals क्या है?

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ये तो हम सभी जानते है कि गूगल सर्च इंजन अपनी अल्गोरिथम में हमेशा बदलाव करता रहता है। उसके अनुसार ही हमे अपनी Websites या Blogs में भी थोड़े बहुत बदलाब करने पड़ते है। आज हम गूगल के नये Ranking फैक्टर Core Web Vitals क्या है?, के बारे में हिंदी में बात करने वाले है जो की Google Algorithm की नई अपडेट है। यह हमारे यूजर एक्सपीरियंस को बढाने तथा लोडिंग टाइम कम करने से सम्बंधित है।

Core Web Vitals क्या है?

Google Algorithm क्या होती है?

Google दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है। इंटरनेट पर बहुत बड़ी सख्या में Websites या Blogs मौजूद है। जिनको हम सर्च इंजन के माध्यम से अपने ब्राउज़र में देख पाते है। किस ब्लॉग को किस Keyword पर सर्च इंजन के पहले पेज पर रैंक करना है और किस वेबसाइट को फर्स्ट पोजीशन पर रखना है। यह सब गूगल की सर्च Algorithm के ऊपर निर्भर करता है। जिसे गूगल Bot भी कहा जाता है।

गूगल अपनी Search Algorithm में समय समय पर बदलाब करता है। जिसका असर सभी ब्लॉग की रैंकिंग तथा ट्रैफिक पर पड़ता है। कई की रैंकिंग अच्छी हो जाती है तो कई की ख़राब। इसी क्रम में गूगल ने रैंकिंग फैक्टर में कुछ बदलाब के साथ नई अपडेट Core Web Vitals को लांच किया है जो 2020 तथा 2021 में किसी भी Blog को रैंक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी ।

Google Ranking Factor: Core Web Vitals क्या है?

Google ने अपनी सर्च अल्गोरिथम में कुछ बदलाव किये है जिसे गूगल ने Core Web Vitals नाम दिया है। Core Web Vitals, Google Ranking Factor में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पूर्ण रूप से यूजर के एक्सपीरियंस पर निर्भर करता है। Core Web Vitals Google Web Vitals का Subset होते है। यह सभी ब्लॉग और वेबसाइट के पेजेज पर लागु किया जाता है। इनका उपयोग सभी साइट Owners को करना चाहिए जिससे गूगल सर्च रैंकिंग में उनका ब्लॉग अच्छा परफॉर्म कर सके। Web Vitals सभी Users के एक्सपीरियंस पर निर्भर करता है।

इसमें कई फैक्टर को जोड़ा गया है। जो इस बात पर निर्भर करते है कि आप की साइट कितनी स्पीड से लोड हो रही है। उसका यूजर से इंटरेक्शन कितना जल्दी हो रहा है। जब यूजर किसी भी ब्लॉग के पेजेज को मोबाइल या डेस्कटॉप पर देखने के लिए जाता है तो पेज लोड होने का एक्सपीरियंस स्पीड की Terms में, कितनी तेजी से लोड हो रहा है यह सब Core Web Vitals के मैट्रिक्स पर निर्भर करता है।

Core Web Vitals की मैट्रिक्स

दोस्तों गूगल ने जो Core Web Vitals अपडेट किया है। वह 3 मैट्रिक्स पर निर्भर है। यदि किसी ब्लॉग में ये तीन कंडीशन पूरी हो रही है तो निश्चित रूप से इसका रिजल्ट अच्छा आएगा और यह गूगल में रैंक कर सकता है। ये तीनो मैट्रिक्स यूजर के इंटरेक्शन पर निर्भर करती है। आइये जानते है इन 3 महतपूर्ण मैट्रिक्स के बारे में आसान शब्दों में हिंदी में।

लार्जेस्ट कंटेंटफुल पेंट (LCP )

यह पूर्ण रूप से पेज लोड पर निर्भर करता है। जब हम किसी भी वेबसाइट या ब्लॉग पेज को मोबाइल या डेस्कटॉप पर लोड करते है तो यह इमेज, वीडियो और कंटेंट के साथ कितनी तेज गति से लोड होता है। इन सब पर LCP निर्भर करता है। इसको हम तीन तरीके से चेक करते है।

Core Web Vitals क्या है? LCP

First Input Delay (FID)

FID में interactivity को measure किया जाता है। यदि आप अपने ब्लॉग पर यूजर को अच्छा एक्सपीरियंस देना चाहते है तो ब्लॉग के पेज की FID 100 मिलीसेकंड से कम होनी चाहिए।

FID

Cumulative Layout Shift (CLS)

CLS के द्वारा विसुअल स्टेबिलिटी को Measure किया जाता है। यूजर को अच्छा एक्सपीरियंस देने के लिए पेज का CLS 0.1 से कम होना चाहिए ।

CLS

इस लेख से हमने क्या सीखा

दोस्तों इस लेख के माध्यम से हमने गूगल के नए रैंकिंग फैक्टर core web vitals क्या है? तथा इसकी ३ महत्वपूर्ण मैट्रिक्स के बारे में विस्तार से जाना। उम्मीद करता हूँ आप को ये आर्टिकल पसंद आया होगा। यदि आप का कोई प्रश्न या सुझाव हो तो हमे अवश्य भेजे। इस आर्टिकल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्विटर आदि पर अवश्य जरूर शेयर करें।

हिंदी दुनिया पर आने के लिए आप का धन्यवाद।

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