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कोरोना का कहर – हिंदी कविता

आज जब कोरोना वायरस नाम की महामारी भारत में अपने पैर पसार रही है। उस समय यह कविता लिखी गई। तो आइये पढ़ते है कोरोना का कहर – हिंदी कविता

कोरोना का कहर - हिंदी कविता

कोरोना का कहर है छाया
प्रकृति ने कोहराम मचाया।

भूल गये थे जो गाँवो को ,
गाँवो में आश्रय खोज रहे।

कोरोना के डर से देखो,
घर, गांव की ओर दौड़ रहे।

गांवो में अब कुछ नहीं रक्खा,
कहने वाले, गांवो में स्वर्ग देख रहे।

लगता था जिनको विदेश प्यारा,
देश में आने को वो तरस रहे।

बैठे थे जो विदेशो में ,
उनको घर परिवार याद दिलाया।

कोरोना का है रूप भयंकर,
कही न पीछा छोड़ेगा।

बचना यदि चाहो तुम,
रहो अंदर, बाहर न आओ तुम।

वो ना गांव, शहर देखता है,
निकला बाहर, उसे ना छोड़ता है।

आप ने कोरोना का कहर – हिंदी कविता को पढ़ा।

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