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Saap Sidhi Ka Khel महत्वपूर्ण जानकारी

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सांप सीढ़ी का खेल तो बचपन में सभी ने खेला होगा। जिसे अंग्रेजी में Snake Ladder के नाम से जाना जाता है। आजकल तो लोग इसको ऑनलाइन भी खेलते है। लेकिन क्या आप जानते है

सांप सीढ़ी के खेल का जनक कौन सा देश है ?

इसको खेलने के पीछे का क्या कारण था ?

Saap Sidhi Ka Khel सबसे पहले किसने खेला था ?

Saap Sidhi Ka Khel
saap sidhi ka khel

ऐसे ही बहुत से सवालों का जबाव हम इस लेख में पढ़ने वाले है। आइये शुरू करते है।

Saap Sidhi के खेल का जनक कौन सा देश है ?

बहुत से खेल ऐसे है जिनका प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। Saap Sidhi उनमें से एक है। ज्यादातर भारतीय यह मानते है कि सभी खेलों के जन्मदाता अंग्रेज है। क्योकि अंग्रेजो ने हमारे देश पर 200 वर्ष तक राज़ किया और हमारे मन में हमारी की संस्कृति को छोटा दिखाना सिखाया। अंग्रेजो के चले जाने के बाद भी पश्चिमी देशों के प्रति लगाव अभी तक बना हुआ है। बहुत से लोग तो यह मानने को भी तैयार नहीं की भारत में किसी चीज़ की खोज हुई है। क्योकि अंग्रेजो ने यहाँ की चीज़ो को अपने नाम से प्रस्तुत किया है।

सांप सीढ़ी के खेल के बारे में भी हम यही सोचते है कि इसका आविष्कार भी विदेशों में हुआ होगा लेकिन ऐसा नहीं है। साप सीढ़ी के खेल की शुरुआत भारत में हुई थी।

जी हाँ दोस्तों यह खेल तेरहवीं शताब्दी में शुरू हुआ। इसको बनाने वाले महान गुरु संत ज्ञान देव थे। साप सीढ़ी का डिज़ाइन इन्होने ही तैयार किया था। उस समय साप सीढ़ी का नाम मोक्षपतम था। इसका उद्देश्य बच्चे से लेकर बड़ो तक में ज्ञान का संचार करना था। तो दोस्तों आप को पता चल गया होगा कि सांप सीढ़ी के खेल की शुरुआत भारत में हुई थी।

सांप सीढ़ी को क्यों बनाया गया? | Why was the snake ladder made?

सांप सीढ़ी के खेल को मूल रूप से मोक्षपट के नाम से जाना जाता है। यह केवल मनोरंजन के लिए नहीं बनाया गया जैसा हम आज देखते है। क्योंकि आज के समय तो यह केवल मनोरंजन के रूप में ही खेल जाता है। इसको बनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को जीवन जीने का तरीका समझाना था।

जैसा इसके नाम से ही पता चलता है इसमें दो चीज़े है सांप और सीढ़ी। इसमें सीढ़ी हमारे अच्छे कर्म का प्रतिनिधित्व करती है। यह दिखती है की यदि मनुष्य अपने धर्म का अच्छे से पालन करें तो उसे सफलता मिल ही जाती है और वह नई नई उचाईयों को छूता है।

दूसरी तरफ यदि हम बात करे साप की तो यह हमारे अवगुणों और बुरे कर्मो को दर्शाता है। हम कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाए यदि हम अपनी अच्छाई का त्याग कर देंगे तो एक दिन सांप हमें खायेगा और हम अपनी पुरानी हालत में पहुंच जायेंगे।

आसान शब्दों में कहे तो सीढ़ीयाँ अर्थात अच्छे काम हमे स्वर्ग लोक की ओर ले जाते है और हमारे अबगुण मोहमाया के जाल में फसा देते है।

सांप सीढ़ी के खेल को कौड़ियों और पाँसे का खेल भी कहा जाता है।

समय के साथ साथ जैसे जैसे लोग इस खेल को समझने लगे उन्होंने इसमें अपने धर्म के अनुसार परिवर्तन किया। करीब 19 बी शताब्दी में अंग्रेजो ने इस खेल के बारे में जाना और इसको अपने रूप में परिवर्तन कर दिया। उन्होंने इसका नाम Snake and ladder रख दिया।

अब Saap Sidhi Ka Khel विश्व भर में खेला जाता है। लेकिन बहुत काम लोग यह जानकारी रखते है। आशा करता हु आप को यह जानकारी पसंद आयी होगी। यह लेख कैसा लगा कमेंट करके अवश्य बताए।

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