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क्या आप जानते है भारत के प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में

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वर्तमान इंडिया में शिक्षा व्यवस्था के हालात इतने अच्छे नहीं है। आजादी के इतने दिन के बाद भी सभी लोगो को शिक्षा दिला पाना संभव नहीं हो पाया है। ऐसा कैसे हो गया कि विश्व गुरु कहलाने वाला भारत शिक्षा में इतना पिछड़ गया। भारत को इस हालत में पहुंचाने का काम अंग्रेजो ने किया है। जब दुनिया पढ़ना लिखना तक नहीं जानती थी तब भारत में शिक्षा के लिए गुरुकुल और यूनिवर्सिटी चलती थी। आज हम इस लेख के माध्यम से भारत के प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में जानकारी करेंगे। आइये शुरू करते है।

जानिए भारत के प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में

जब दुनिया के देश पढ़ना लिखना तो छोड़ो ठीक से रहना भी नहीं जानते थे उस समय भी भारत में विश्वविद्यालय चलते थे। जिनमें पढ़ने के लिए विदेशों से भी छात्र आते थे। आइये जानते है ऐसे ही कुछ विश्वविद्यालय के बारे में जो प्राचीन भारत की धरोहर थे।

नालंदा विश्वविद्यालय – Nalanda University

नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया की सबसे प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में से एक है। इसका पुस्तक भंडार बहुत विशाल था। यह वर्तमान के बिहार राज्य में स्थित था। इसकी स्थापना 5 वी शताब्दी में सम्राट कुमार गुप्त ने की थी। लेकिन इसके और भी प्राचीन होने के प्रमाण मिलते है। इसमें बहुत से विदेशी भी रहे है।

नालंदा पर 1193 में बख्तियार खिलजी ने आक्रमण किया और इसमें आग लगवा दी। कहा जाता है कि इसका पुस्तक भंडार इतना विशाल था कि यह करीब तीन महीनों तक जलता रहा।

तक्षशिला विश्वविद्यालय – Takshashila University

तक्षशिला विश्वविद्यालय भी प्राचीनतम विश्वविद्यालय में से एक है। तक्षशिला शहर वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है। इसकी स्थापना भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर हुई थी। यह करीब 3 हजार साल पुराना विश्वविद्यालय है। इसकी खोज अंग्रेज कनिंघम ने 1853 में की थी। 5 वी शताब्दी के चीनी यात्री फाहियान ने इसकी भव्यता का वर्णन किया है।

उसके बाद यहाँ पर कई अरबी आक्रमण हुए। जिन्होंने इस महान विश्व विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया।

रत्नागिरी विश्वविद्यालय – Ratnagiri University

रत्नागिरी वर्तमान में ओडिशा के जयपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना करीब 5 वी शताब्दी में हुई थी। यह प्रमुख बौद्ध स्थल था। इसकी खोज 1960 के लगभग हुई। इसका नाम भी प्रमुख प्राचीन विश्व विश्वविद्यालयो में लिया जाता है।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय – Vikramshila University

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना 8 वी शताब्दी में हुई थी। इसका निर्माण पाल वंश के राजा धर्म पाल ने करवाया था। यह बिहार राज्य के भागलपुर जिले में स्थित है। यह नालंदा के समकक्ष ही माना जाता है।

1203 में बख्तियार खिजली ने नालंदा की तरह इस पर भी आक्रमण किया। इसमें उपस्थित सभी शिक्षक और विधार्थीयो को मार डाला। पुरे विद्यालय को तहस नहस कर दिया।

वल्लभी विश्वविद्यालय – Valabhi University

यह करीब 2 हजार साल पुराना विद्यालय है। यह वर्तमान में सौराष्ट्र, गुजरात में स्थित है। चीनी यात्री इत्सिंग, जिसने नालंदा से शिक्षा ग्रहण की थी। उसने भी इस यूनिवर्सिटी के बारे में बताया है।

अरबी आक्रमणकारियो ने वल्लभी विश्वविद्यालय को बर्बाद कर दिया।

उदंतपुरी या ओदंतपुरी विश्वविद्यालय – Odantanpuri University

उदंतपुरी या ओदंतपुरी विश्वविद्यालय प्राचीन भारत का एक प्रतिष्ठित विद्यालय था। एक तिब्बती इतिहासकार के अनुसार इसमें एक समय में १२,000 विधार्थी शिक्षा लेते थे। यह बिहार राज्य में स्थित है। इसकी स्थापना 8 वीं शताब्दी में पाल वंश के शासक गोपाला प्रथम के द्वारा की गयी थी।

प्राचीन भारत के जितने भी विश्व विद्यालय थे सब का अंत अरब आक्रमणकारियों के द्वारा किया गया। उदंतपुरी या ओदंतपुरी विश्वविद्यालय को बख्तियार खिलजी ने बर्बाद किया था।

सोमपुरा विश्वविद्यालय – Sompura University

सोमपुरा विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजाओं के द्वारा की गयी थी। यह वर्तमान में बांग्लादेश में अवशेषों के रूप में स्थित है। इसको बौद्ध महाविहार के रूप में भी जाना जाता है।

मुस्लिम आक्रमणों से पहले तक यह सुचारु रूप से चलता था। करीब 13 वीं शताब्दी में इसको नष्ट कर दिया।

पुष्पागिरि विश्वविद्यालय – Pushpagiri University

पुष्पागिरि विश्वविद्यालय प्राचीनतम विश्व विद्यालयों में से एक है। इसकी स्थापना कलिंग राजाओं के द्वारा की गयी थी। यह 11 वी शताब्दी तक कार्य करता रहा। उसके बाद इसको नष्ट कर दिया गया।

वर्तमान में इसके अवशेष ओडिशा राज्य में स्थित है।

जगदद्ल विश्वविद्यालय – Jagaddla University

जगदद्ल विश्वविद्यालय एक बौद्ध विहार था। इसकी स्थापना अंतिम पाल वंश के राजा नरेश रामपाल के द्वारा की गई थी। यह लगभग 11 वीं शताब्दी से 12 वीं शताब्दी के मध्य तक कार्य करता रहा। वर्तमान में इसके अवशेष बांग्लादेश में स्थित है।

यदि आप ने इस लेख को पूरा पढ़ा है तो आप भलीभांति जान चुके होंगे कि प्राचीन भारत में शिक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी। इन सब के अलावा भी कई विश्व विद्यालय उस समय भारत में मौजूद थे। ये भी जान चुके होंगे की इसको नष्ट करने का कितना भयंकर प्रयास किया गया। इसके बाबजूद अंग्रेजो के आने तक भारत में लाखों की संख्या में गुरुकुल चलते थे। उनको खत्म करने का काम अंग्रेजों ने किया।

आपको भारत के प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में जानकारी कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताये। इसको अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें।

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